श्री प्रधानमंत्री जी,
भारत सरकार,
नई दिल्ली
दिनाक : जून 29 2011
विषय : बिल पास करवाना है .
आदरणीय प्रधानमंत्री जी,
हमारे प्यारे भारत की 120 करोड़ की आबादी में से मैं एक हूँ, शायाद मायने नहीं रखती, पर वह कहते हैं न की एक वोट भी बहुत मायने रखता है . उस एक वोट का वास्ता देते हुये मैं यह चिट्ठी लिख रही हूँ. मेरी कुछ मांगे हैं जो मैं समझती हूँ हमारे देश को आधुनिक युग की तरफ तीव्रता से ले जायेगी.
पहेली मांग यह है की देश में कोई भी नेता ( राजनैतिक , सामाजिक , योगिक , धार्मिक या कोई भी व्यक्ति जो किसी जन समुदाय का प्रतिनिधितिव करता हो ) व्रत करे तो, वह आमरण हो ( मतलब fast unto death)------ ऐसा करने से देश की आबादी की बड़ी भलाई होगी. जब तक समाचार बनेगा, धरना लगेगा, parliament में झगडा होगा, फिर वोटिंग होगी, बहुमत बनेगा, और बिल पास होने की अर्जी डले गी तब तक एक साल तो बीत ही जायेगा -------- परिणाम : नेताजी शहीद, नेताजी के अंधे चले शहीद, भारत की जनसँख्या में कटोती, और तो और कोई भी यू ही उठ कर व्रत करने से पहले एक बार नहीं दस बार सोंचे गा .. यह मांग है मेरी जिस का बिल पास करवाना है. इसके लिये मैं व्रत करनी को तैयार हूँ, क्यूंकि मैं नेता नहीं, मैं वादा करती हूँ की भूख से भूख लगने तक कुछ नहीं खाऊँगी और अपना व्रत यह बिल पास होने तक नहीं तोडूंगी.
व्रत करने का कारण कोई भी हो, जो पावन जंतर मंतर पर व्रत करता है देश उसके साथ होता है, बस ऐलान करने की ज़रुरत होती है जो की मैं इस पत्र द्वारा कर रही हूँ. यह बिल अगले महीने की 15 तरीक तक पास होना चाहिये क्योँ की उसके बाद दूसरा बिल पास होने का व्रत scheduled है . आशा करती हूँ आप timeline की महत्ता को समझेगे .
माननीय मंत्री श्री मायावती जी , ने एक बड़ा park बनाया है UP में. जहाँ डरावने पुतले और सजीले हाथी लगे हैं. पता चला डरावने पुतले खुद मायावती जी हैं और सजीले हाथी उनका पहचान चिहिन. डरावनी पहचान को न पहचाने के लिये शमा. पर यह बात मेरी दूसरी मांग की तरफ ले जाती है.
दूसरा बिल : मांग यह है की माया बहेन के बनाये पार्क में जहाँ सजीले हाथी लगे हैं , वहां गधे और जहाँ डरावनी माया बहेन हैं वहां आम आदमी होना चाहिये ----------यह इसलिये ताकि आम आदमी की छवि उनके सामने हमेशा रह सके गधे के रूप में , जो अपनी आखों के सामने अपने पैसे बर्बाद होते देख रहा है. इस बिल को पिछले बिल के एक महीने बाद पास कर दीजियेगा. तब तक सारी जनता मुझे जान गयी होगी, मुझे पत्रकारों का साथ, opposition का हाथ, सर, पैर , पीठ सब मिल गया होगा. हो सकता है कोई मंत्री मेरी इस धुन पर नाच भी उठे. मुझे अपने प्यारी सुषमा स्वराज बहेन पर पूरा विश्वास है उन्हें नाच गाना खूब पसंद है. खैर यह सब होने पर आप यह न कहे की बताया न था इसलिये पत्र लिख रही हूँ.
बाकि कुशल मंगल है, घर पर भाभी जी को मेरा प्रणाम, पोते पोतियूं को प्यार. मिलते हैं जंतर मंतर पर.
भारत माता की जय.
एक असीम देश भक्त
हविषा
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